Summary: पटना मेट्रो के जगनपुरा स्टेशन निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण में गंभीर लापरवाही सामने आई है। दो अन्य व्यक्तियों की जमीन के बदले 93 वर्षीया बुजुर्ग महिला निर्मला देवी के मकान को बिना किसी नोटिस और अधिग्रहण प्रक्रिया के ध्वस्त कर दिया गया। सर्वे में दो मंजिला मकान को 'शून्य' दिखाए जाने के खुलासे के बाद पटना समाहर्ता के निर्देश पर 4 सदस्यीय संयुक्त जांच दल गठित किया गया है।
📌 मुख्य बातें एक नज़र में
- बिना नोटिस और अधिग्रहण कार्रवाई: 93 वर्षीया निर्मला देवी के एक तल्ले के मकान को बिना किसी सूचना व विधिक अधिग्रहण के ध्वस्त किया गया।
- सर्वे रिपोर्ट में हेरफेर: मौके पर मौजूद दो मंजिला पक्के मकान और दुकानों को सरकारी सर्वे रिपोर्ट में 'शून्य' (कोई संरचना नहीं) दिखाया गया।
- गलत प्लॉट पर डिमोलिशन: अधिग्रहण प्रक्रिया दो अन्य व्यक्तियों की जमीन के लिए शुरू हुई थी, लेकिन बुलडोजर निर्मला देवी की संपत्ति पर चला दिया गया।
- वकील के गंभीर आरोप: वकील राकेश कुमार सिंह ने सामान गायब करने और अधिकारियों द्वारा जेल भेजने की धमकी देने का आरोप लगाया; कोर्ट जाने की चेतावनी दी।
- 4 सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच: पटना समाहर्ता के निर्देश पर अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, भू-मापक, फुलवारी शरीफ CO और राजस्व अधिकारी की संयुक्त जांच टीम गठित।
- PMRCL की प्रतिक्रिया: मेट्रो PRO अर्चना खुशी ने स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण जिला प्रशासन का काम है और प्रशासन द्वारा दी गई जमीन पर ही कार्य हो रहा है।
पटना मेट्रो परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण में एक बड़ी और बेहद चिंताजनक लापरवाही सामने आई है। जगनपुरा मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए जिन दो व्यक्तियों की जमीन अधिग्रहित की गई थी, उसके बदले 93 वर्षीया निर्मला देवी के एक तल्ले के मकान को बिना किसी नोटिस, बिना अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी किए ध्वस्त कर दिया गया। (दैनिक जागरण रिपोर्ट)
मामला तब उजागर हुआ जब निर्माण कार्य करने अधिकारी दोबारा उस जगह पहुंचे और निर्मला देवी के वकील राकेश कुमार सिंह ने उन्हें मौके पर रोक दिया और दस्तावेज दिखाने को कहा।
क्या हुआ जगनपुरा में?
जगनपुरा मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए प्रशासन ने दो व्यक्तियों की जमीन अधिग्रहित करने की प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन जब निर्माण कार्य शुरू हुआ तो अधिकारी उन दोनों की जमीन की जगह निर्मला देवी के मकान तक पहुंच गए।
बिना किसी पूर्व सूचना के, बिना नोटिस जारी किए और बिना आधिकारिक अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी किए — 93 वर्षीया निर्मला देवी का एक तल्ले का मकान ध्वस्त कर दिया गया और उनका सारा घरेलू सामान भी गायब कर दिया गया।
निर्मला देवी नवादा जिले के मीरगंज में रहती हैं। उन्हें इस पूरे विध्वंस की जानकारी दिसंबर में मिली। इसके बाद उनके वकील ने मार्च में पटना जिलाधिकारी को पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराया और न्याय की गुहार लगाई।
सर्वे रिपोर्ट में भी मिली गड़बड़ी
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू सर्वे रिपोर्ट का सामने आया है। सरकारी सर्वे रिपोर्ट में निर्मला देवी की जमीन पर बनी संरचना को "शून्य" (Zero) दर्शाया गया — यानी जैसे उस जमीन पर कोई मकान था ही नहीं।
जबकि जमीनी वास्तविकता यह है कि उस भूखंड पर दो मंजिला पक्का मकान बना हुआ है। अब यह बड़ा सवाल उठता है कि जब मौके पर दो मंजिला मकान और दुकानें मौजूद थीं, तो उसे सरकारी सर्वे रिकॉर्ड में शून्य कैसे दिखाया गया? क्या भू-अर्जन रिकॉर्ड में जानबूझकर हेरफेर किया गया?
वकील राकेश कुमार सिंह ने जब अधिकारियों से निर्मला देवी के नाम का नोटिस, गजट नोटिफिकेशन और सर्वे रिपोर्ट मांगी, तो अधिकारी उन्हें दूसरे दो व्यक्तियों के नाम के दस्तावेज दिखाने लगे — जिनकी जमीन असल में अधिग्रहित की जानी थी।
वकील का गंभीर आरोप — जेल भिजवाने की धमकी
निर्मला देवी के अधिवक्ता राकेश कुमार सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जब उन्होंने अवैध निर्माण और कब्जे को रोकने की कोशिश की, तो कब्जा कराने आए अधिकारियों ने उन्हें जेल भिजवाने और झूठे मुकदमों में फंसाने की खुली धमकी दी।
उन्होंने साफ कहा कि अगर एक सप्ताह के भीतर इस गंभीर मामले का विधिसम्मत निपटारा नहीं हुआ और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे पटना उच्च न्यायालय (High Court) में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ याचिका दायर करेंगे।
मौके पर मौजूद मजिस्ट्रेट से जब बातचीत की कोशिश की गई तो वह बगल की एक दुकान में जाकर बैठ गए और दुकानदार को बाहर से किसी को भी अंदर न आने देने का निर्देश दे दिया।
प्रशासन का एक्शन — 4 सदस्यीय जांच टीम गठित
मामला सुर्खियों में आने और पीड़िता के पावर ऑफ अटॉर्नी धारक द्वारा पुख्ता दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद भू-अर्जन निदेशालय बिहार ने कड़ा रुख अपनाया है।
पटना समाहर्ता (DM) के निर्देश पर चार सदस्यीय संयुक्त जांच दल गठित किया गया है, जिसमें निम्नलिखित अधिकारी शामिल हैं:
- अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी (Additional District Land Acquisition Officer)
- भू-मापक (Government Surveyor/Amin)
- फुलवारी शरीफ के अंचलाधिकारी (Circle Officer - CO)
- राजस्व अधिकारी (Revenue Officer)
जांच टीम को तत्काल मौके पर जाकर जमीन की पैमाइश, सीमांकन और निर्माण की वास्तविक स्थिति की सूक्ष्म जांच कर स्पष्ट रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
जांच के बावजूद काम जारी रहा — बड़ा सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा विरोधाभास यह सामने आया कि प्रशासन ने स्पष्ट कहा था — "जब तक जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक उस स्थल पर कोई काम नहीं होगा।" लेकिन इसके बावजूद मौके पर निर्माण कार्य और पिलर शटरिंग का काम बेरोकटोक जारी रहा।
यह जांच का मुख्य विषय है कि:
- जिस जमीन का अधिग्रहण आधिकारिक रिकॉर्ड में दिखाया गया था, वहां मौजूद दो मंजिला मकान और दुकानें कार्रवाई से कैसे बची रहीं?
- क्या जमीन अधिग्रहण और पैमाइश की प्रक्रिया में किसी स्तर पर दस्तावेजों में जानबूझकर फेरबदल किया गया?
- पीड़िता के मकान को तोड़े जाने और उनका सामान नष्ट होने की भरपाई और मुआवजा कौन सुनिश्चित करेगा?
पटना मेट्रो PRO का जवाब
इस पूरे भूमि विवाद पर पटना मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PMRCL) की आधिकारिक पक्ष रखते हुए मेट्रो PRO अर्चना खुशी ने कहा:
"भूमि अधिग्रहण का मामला पूरी तरह जिला प्रशासन व जिला भू-अर्जन कार्यालय से संबंधित है। जिस भूमि पर दावा किया जा रहा है, उसे पटना मेट्रो को जिला प्रशासन ने उपलब्ध कराया है और मेट्रो उसी चिन्हित भूमि पर कार्य कर रही है।"
यानी PMRCL का कहना है कि उनकी एजेंसी सीधे तौर पर जमीन का अधिग्रहण नहीं करती; उन्हें प्रशासन द्वारा जो जमीन सौंपी जाती है, वे उसी पर निर्माण आगे बढ़ाते हैं। इस प्रकार मूल चूक जमीन चिन्हित करने और पैमाइश करने वाले प्रशासनिक अमले के स्तर पर दिखाई दे रही है। शहर में भूमि अधिग्रहण और अतिक्रमण हटाने के अन्य मामलों की समीक्षा आप हमारी पटना जंक्शन भूमि अधिग्रहण व दुकान खाली कराने की रिपोर्ट में देख सकते हैं।
93 वर्षीया निर्मला देवी — कौन हैं?
निर्मला देवी नवादा जिले के मीरगंज की रहने वाली हैं और उनकी उम्र 93 वर्ष है। वृद्धावस्था के कारण वे अपना अधिकांश समय नवादा और बेगूसराय में अपनी बेटी के पास बिताती हैं। जगनपुरा में उनका अपना पैतृक मकान था, जिसे उनकी अनुपस्थिति और जानकारी के बिना तोड़ दिया गया।
दिसंबर में जब परिजनों को इसकी भनक लगी, तो उन्होंने विधिक प्रक्रिया के तहत वकील के जरिए मार्च में पटना डीएम को औपचारिक पत्र सौंपा। यह मामला महीनों तक फाइलों में घूमता रहा जिसके बाद अब जाकर संयुक्त जांच कमेटी बनाई गई है।
यह मामला क्यों है महत्वपूर्ण?
पटना मेट्रो बिहार की राजधानी के लिए एक ऐतिहासिक और बहुप्रतीक्षित सार्वजनिक परिवहन परियोजना है, जिससे लाखों यात्रियों को प्रतिदिन राहत मिलेगी। निर्माण कार्यों की समग्र प्रगति और समयसीमा जानने के लिए आप हमारा पटना मेट्रो 2030 निर्माण अपडेट और मंत्री समीक्षा रिपोर्ट पढ़ सकते हैं।
लेकिन किसी भी विकास महाप्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया का पूरी तरह पारदर्शी, मानवीय और कानूनसम्मत होना अत्यंत अनिवार्य है। यदि बिना नोटिस, बिना विधिक प्रक्रिया और बिना उचित मुआवजे के बुजुर्ग नागरिकों के आशियाने जमींदोज किए जाएंगे, तो यह नागरिकों के अधिकारों का हनन होने के साथ-साथ विकास की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है। मेट्रो और बुनियादी ढांचे के राष्ट्रीय विश्लेषण के लिए Metro Rail News और स्थानीय कवरेज के लिए Prabhat Khabar भी इस मामले पर नजर रखे हुए हैं।
📌 Disclaimer: यह जानकारी दैनिक जागरण और संबंधित पक्षकारों द्वारा प्रस्तुत विधिक दस्तावेजों पर आधारित है। मामले में प्रशासनिक जांच जारी है। PMRCL और पटना जिला प्रशासन के अंतिम आधिकारिक जांच निष्कर्षों के अनुसार वस्तुस्थिति स्पष्ट होगी। patnametro.net किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं करता — यह एक निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक रिपोर्ट है।