Summary: पटना मेट्रो ने मोइनुल हक से पटना जंक्शन तक 5.2 किलोमीटर लंबी अपलाइन सुरंग का काम पूरी तरह संपन्न कर लिया है। PC-03 पैकेज के तहत TBM-1 का यह 9वां और अंतिम ब्रेकथ्रू था।
📌 मुख्य बातें एक नज़र में
- उपलब्धि: मोइनुल हक से पटना जंक्शन तक 5.2 KM अपलाइन सुरंग पूरी।
- ब्रेकथ्रू: PC-03 पैकेज में 9वां TBM ब्रेकथ्रू (TBM-1 का अंतिम ब्रेकथ्रू)।
- मार्ग में स्टेशन: मोइनुल हक, PU, PMCH, गांधी मैदान, आकाशवाणी, पटना जंक्शन।
- ठेकेदार व लागत: L&T (₹1,989 करोड़ PC-03 अंडरग्राउंड पैकेज)।
- डेडलाइन: पूरा अंडरग्राउंड खंड दिसंबर 2028 तक यात्रियों के लिए खुलने का लक्ष्य।
पटना की जमीन के नीचे 5.2 किलोमीटर सुरंग तैयार हो चुकी है — पटना मेट्रो रेल परियोजना के लिए यह एक ऐसा ऐतिहासिक दिन है जिसे याद रखा जाएगा। जमीन के नीचे लगातार काम करती आ रही TBM-1 (Tunnel Boring Machine) ने अपना काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। मोइनुल हक मेट्रो स्टेशन से पटना जंक्शन मेट्रो स्टेशन तक अपलाइन में पूरी 5.2 किलोमीटर लंबी सुरंग तैयार हो गई है।
PC-03 पैकेज के तहत यह 9वां TBM ब्रेकथ्रू था और TBM-1 के लिए इस स्ट्रेच का यह आखिरी ब्रेकथ्रू भी था। यानी इस मशीन को जो महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वह अब पूरी तरह पूरी हो चुकी है।
पटना मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PMRCL) ने इस उपलब्धि की घोषणा करते हुए कहा कि हर ब्रेकथ्रू के साथ एक तेज, सुरक्षित और बेहतर तरीके से जुड़े हुए पटना का सपना हकीकत के और करीब आता जा रहा है।
यह 5.2 किलोमीटर सुरंग क्यों है इतनी बड़ी उपलब्धि?
ऊपर से देखने पर शायद लगे कि एक सुरंग और बन गई, लेकिन जो लोग इस प्रोजेक्ट की जमीनी चुनौतियों को करीब से जानते हैं, वे समझते हैं कि यह कितना कठिन इंजीनियरिंग कार्य था।
पटना एक बेहद घना और ऐतिहासिक शहर है। जिन इलाकों के नीचे से यह सुरंग गुजरी है — मोइनुल हक स्टेडियम, पटना विश्वविद्यालय, PMCH, गांधी मैदान, आकाशवाणी और पटना जंक्शन — ये सब शहर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाके हैं। यहां जमीन के ऊपर हर वक्त हजारों लोग, गाड़ियां, पुरानी विरासत इमारतें और दशकों पुराना बुनियादी ढांचा मौजूद है।
इतनी घनी आबादी के नीचे से सुरंग खोदना मतलब है — एक भी मिलीमीटर की गलती की गुंजाइश नहीं। जमीन की स्थिति लगातार बदलती है, भूमिगत जल का भारी दबाव रहता है और ऊपर की इमारतों को जरा सा भी नुकसान नहीं होना चाहिए। यही वजह है कि TBM मशीनें अत्यंत सावधानी और निरंतर निगरानी के साथ काम करती हैं।
TBM-1 ने कितना और कैसा सफर तय किया?
TBM-1 ने मोइनुल हक स्टेडियम स्टेशन से अपनी खुदाई शुरू की थी और पटना जंक्शन तक अपलाइन में पूरी सुरंग बनाई। इस लंबी यात्रा के दौरान मशीन पटना विश्वविद्यालय, PMCH, गांधी मैदान और आकाशवाणी — चारों भूमिगत स्टेशनों के नीचे से गुजरी।
प्रत्येक स्टेशन पर मशीन को सुरक्षित रोका गया, वहां स्टेशन बॉक्स की जरूरी खुदाई और सपोर्ट संरचना पूरी की गई और फिर उसे आगे के सफर पर रवाना किया गया। यह 5.2 किलोमीटर का सफर महीनों की अनवरत मेहनत, तकनीकी विशेषज्ञता और सैकड़ों इंजीनियरों व श्रमिकों के टीम वर्क का शानदार नतीजा है।
पटना जंक्शन तक सुरंग तैयार — यात्रियों को क्या मिलेगा?
पटना जंक्शन इस पूरे क्षेत्र का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन है। यहां से देश के हर कोने के लिए ट्रेनें मिलती हैं और रोज लाखों यात्री यहां से सफर शुरू या खत्म करते हैं।
जब पटना मेट्रो सेवा शुरू होगी, तो यात्री पटना जंक्शन रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरकर सीधे अंडरग्राउंड मेट्रो में प्रवेश कर सकेंगे — बिना सड़क पर निकले, बिना ऑटो या टैक्सी का झंझट सहे और बिना भारी ट्रैफिक जाम में फंसे। शहर के किसी भी कोने में पहुंचना अब चुटकियों का काम होगा।
इसके अलावा यह सुरंग पटना के उन प्रमुख केंद्रों को भी आपस में जोड़ती है जहां कनेक्टिविटी हमेशा से एक बड़ी समस्या रही है — PMCH अस्पताल आने वाले मरीज और तीमारदार, पटना विश्वविद्यालय के लाखों छात्र, गांधी मैदान और आकाशवाणी के आसपास काम करने वाले दफ्तरी कर्मचारी।
PC-03 पैकेज — अब तक की पूरी प्रगति
PC-03 पैकेज वह प्रमुख ठेका है जिसके तहत Blue Line (Corridor-2) का पूरा अंडरग्राउंड हिस्सा बन रहा है। यह ठेका लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को मिला है और इसकी कुल लागत ₹1,989 करोड़ है।
इस पैकेज में राजेंद्र नगर टर्मिनल से पटना जंक्शन तक ट्विन टनल (दोनों दिशाओं की सुरंग) और सात आधुनिक अंडरग्राउंड स्टेशन शामिल हैं।
| स्ट्रेच / कार्य | वर्तमान स्थिति |
|---|---|
| मोइनुल हक → पटना जंक्शन (अपलाइन) | ✅ 5.2 KM पूरी (9वां ब्रेकथ्रू) |
| राजेंद्र नगर → मोइनुल हक (डाउनलाइन) | ✅ पूरी तरह संपन्न |
| मोइनुल हक → पटना यूनिवर्सिटी (अप + डाउन) | ✅ दोनों टनल पूरी |
| मोइनुल हक → पटना जंक्शन (डाउनलाइन) | 🔄 टनल खुदाई जारी |
| स्टेशन सिविल फिनिशिंग (7 अंडरग्राउंड स्टेशन) | 🔄 ~75% सिविल कार्य पूरा |
| E&M, ट्रैक और सिग्नलिंग सिस्टम | 🔄 टेंडर और शुरुआती कार्य प्रगति पर |
| पूरा भूमिगत खंड यात्री सेवा हेतु चालू | 🎯 लक्ष्य: दिसंबर 2028 |
तकनीकी चुनौतियां — जो बिल्कुल आसान नहीं थीं
पटना की मिट्टी मुख्य रूप से नरम एल्यूवियल है और गंगा नदी के पास होने के कारण यहां का वाटर टेबल (भूमिगत जल स्तर) काफी ऊपर है। ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में जब TBM मशीनें खुदाई करती हैं, तो मिट्टी का अत्यधिक दबाव और पानी के भारी रिसाव को एक साथ नियंत्रित करना पड़ता है।
इसके लिए Earth Pressure Balance (EPB) तकनीक वाली आधुनिक TBM का इस्तेमाल किया गया, जो खास तौर पर दलदली और जलीय मिट्टी के लिए डिजाइन की जाती हैं। यह मशीन आगे कटिंग हेड से मिट्टी खोदती जाती है और साथ-साथ पीछे कंक्रीट के रिंग सेगमेंट लगाकर सुरंग की मजबूत दीवारें तैयार करती जाती है।
सुरंग के ऊपर मौजूद सदियों पुरानी विरासत संरचनाओं और व्यस्त सड़कों की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक सेंसर्स और लेजर मॉनिटरिंग सिस्टम से चौबीसों घंटे जमीन के व्यवहार पर नजर रखी गई। जरा भी धंसाव की आशंका होने पर तुरंत रासायनिक ग्राउटिंग कर स्थिति को स्थिर किया गया।
PMRCL और इंजीनियरों की सराहना
PMRCL और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) की प्रबंधन टीमों ने इस ऐतिहासिक पड़ाव पर पूरी प्रोजेक्ट टीम की जमकर सराहना की है। दिन-रात जमीन के 15 से 20 मीटर नीचे विपरीत परिस्थितियों में काम करने वाले इंजीनियरों, तकनीशियनों और जांबाज श्रमिकों के निरंतर योगदान से ही यह उपलब्धि संभव हो पाई है।
आगे क्या — डाउनलाइन टनल और स्टेशन वर्क
TBM-1 द्वारा अपलाइन की 5.2 KM सुरंग पूरी होने के बाद अब ध्यान डाउनलाइन यानी वापसी दिशा की सुरंग को पूरा करने पर केंद्रित है। इसके साथ ही सात अंडरग्राउंड स्टेशनों (राजेंद्र नगर, मोइनुल हक, PU, PMCH, गांधी मैदान, आकाशवाणी और पटना जंक्शन) में सिविल फिनिशिंग, इंटीरियर, इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल (E&M), लिफ्ट-एस्केलेटर और ट्रैक बिछाने की प्रक्रिया तेज की जाएगी।
लक्ष्य के अनुसार, पटना मेट्रो का पूरा 16-किलोमीटर लंबा Corridor-2 भूमिगत खंड दिसंबर 2028 तक पूरी तरह से यात्री सेवाओं के लिए खोल दिया जाएगा।
निष्कर्ष
5.2 किलोमीटर की यह अपलाइन सुरंग केवल एक तकनीकी व इंजीनियरिंग उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह बदलते और आधुनिक होते नए पटना की पहचान है। बहुत जल्द पटनावासी भी दिल्ली, मुंबई और कोलकाता की तर्ज पर अपने शहर के नीचे रफ्तार भरती अत्याधुनिक मेट्रो ट्रेन का आनंद उठा सकेंगे।